देवघर। देवघर के गरही टांड, मालेडीह, डुमरा सहित आधा दर्जन से ज्यादा गांवों के बच्चे मेले में विषाक्त फास्ट फूड खाने से बीमार हो गए. आनन-फानन में देर रात बच्चों को देवघर के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां उनका इलाज जारी है. कुछ बच्चों का गांव में ही इलाज चल रहा है.
देवघर क ग्रामीण क्षेत्र में विजयादशमी के एक दिन बाद मेले का आयोजन होता है. इस मेले में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं, लेकिन इस बार मेले की खुशी और उमंग का माहौल मातम में बदलते-बदलते रह गया. दरअसल, देवघर प्रखंड के गरहीटांड, मालेडीह और डुमरा सहित लगभग आठ से दस गावों के लोग वर्षों पुराने मेले में इकट्ठा होते हैं. मेले में बच्चों ने जम कर फास्ट फूड का लुत्फ उठाया, लेकिन चाउमिन खाने के साथ ही एक-एक कर बच्चे उल्टी करने लगे और देखते ही देखते मेले में अफरा-तफरी मच गई. जैसे-तैसे बीमार बच्चों को सदर अस्पताल पहुंचाया गया. ग्रामीण की तत्परता से गांव में बड़ा हादसा टल गया.
गांव के लगभग 100 बच्चे अभी भी फूड पॉइजनिंग से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं. ग्रामीणों द्वारा मेले के अवसर पर बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता के प्रति प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए जा रहे हैं. उधर देवघर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक भी अफने ही विभाग पर उंगली उठाते हुए संबंधित फूड इंस्पेक्टर को इसके लिए दोषी ठहरा रहे हैं.
देवघर में श्रावणी मेले के दौरान खाद्य पदार्थ की नियमित जांच के लिए अलग से फूड इंस्पेक्टर की प्रतिनियुक्ति की जाती है, लेकिन इस तरह के ग्रामीण मेले में बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थ की निगरानी के प्रति जिला प्रशासन या संबंधित विभाग जरा भी गंभीर नहीं है।

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